राजस्थान के प्रमुख पशु मेले: 10 राज्य स्तरीय मेले, जगह, तिथि और प्रसिद्ध नस्लें | Rajasthan Pashu Mela List

राजस्थान के प्रमुख पशु मेले में सजे हुए नागौरी बैल और पशु व्यापारी

फ़रवरी की ठंडी सुबह, नागौर के पास मानासर के मैदान में सींगों पर रंगीन फुंदने बांधे सैकड़ों नागौरी बैल खड़े हैं और उनके आसपास दूसरे राज्यों से आए खरीदार। राजस्थान के प्रमुख पशु मेले ऐसे ही लगते हैं। पशुपालन विभाग हर साल 10 राज्य स्तरीय पशु मेले लगाता है, जिनमें नागौर का रामदेव, परबतसर का तेजाजी, तिलवाड़ा का मल्लीनाथ और पुष्कर का मेला सबसे ज़्यादा जाने जाते हैं।

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राज्य स्तरीय पशु मेले10, जिन्हें पशुपालन विभाग आयोजित करता है
सबसे ज़्यादा मेले वाला इलाकानागौर क्षेत्र (रामदेव, बलदेव, तेजाजी) और झालरापाटन (गोमती सागर, चंद्रभागा)
राजस्व के हिसाब से बड़ा मेलाश्री वीर तेजाजी पशु मेला, परबतसर
सबसे प्रसिद्ध नस्लेंनागौरी बैल, मालवी बैल, हरियाणवी गोवंश, बीकानेरी ऊंट
मेलों का मौसमलगभग पूरे साल, पर अक्टूबर से अप्रैल के बीच सबसे ज़्यादा
नई पहल2025 से ज़िला स्तर पर भी पशु मेले शुरू

राजस्थान के 10 राज्य स्तरीय पशु मेले: पूरी सूची

राजस्थान में पशु मेले धर्म और व्यापार, दोनों से जुड़े हैं। ज़्यादातर मेले किसी लोक देवता या मंदिर के मेले के साथ लगते हैं, इसलिए उनकी तारीख हिंदू पंचांग की तिथि से तय होती है, अंग्रेज़ी कैलेंडर से नहीं।

मेलाजगहकब लगता हैकिस लिए प्रसिद्ध
श्री रामदेव पशु मेलामानासर, नागौरमाघ शुक्ल पक्ष (जनवरी-फ़रवरी)नागौरी बैल
श्री बलदेव पशु मेलामेड़ता सिटी, नागौरचैत्र शुक्ल पक्ष (मार्च-अप्रैल)नागौरी बैल
श्री वीर तेजाजी पशु मेलापरबतसर, डीडवाना-कुचामनभाद्रपद, तेजा दशमी के आसपास (अगस्त-सितंबर)नागौरी बैल, बीकानेरी ऊंट
श्री मल्लीनाथ पशु मेलातिलवाड़ा, बालोतराचैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी (मार्च-अप्रैल)ऊंट, घोड़े, बैल
श्री गोमती सागर पशु मेलाझालरापाटन, झालावाड़वैशाख शुक्ल पक्ष (आम तौर पर मई)हाड़ौती का बड़ा पशु मेला
श्री चंद्रभागा पशु मेलाझालरापाटन, झालावाड़कार्तिक, कार्तिक पूर्णिमा के आसपास (नवंबर)मालवी बैल
पुष्कर पशु मेलापुष्कर, अजमेरकार्तिक शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा तक (अक्टूबर-नवंबर)ऊंट, घोड़े, गोवंश
श्री गोगामेड़ी पशु मेलागोगामेड़ी (नोहर), हनुमानगढ़भाद्रपद, गोगा नवमी के आसपास (अगस्त-सितंबर)करीब एक महीने चलने वाला मेला
श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेलाभरतपुरआश्विन शुक्ल पक्ष (सितंबर-अक्टूबर)हरियाणवी नस्ल
श्री शिवरात्रि पशु मेलाकरौलीफाल्गुन, महाशिवरात्रि के आसपास (फ़रवरी-मार्च)हरियाणवी नस्ल, ऊंट

अंग्रेज़ी महीने हर साल थोड़े खिसकते हैं, क्योंकि तिथियां चंद्र कैलेंडर पर चलती हैं। जिस साल जाना हो, उस साल की तारीख यात्रा से पहले पुष्टि करें।

हर पशु मेले की खास बात

श्री रामदेव पशु मेला, नागौर

नागौर शहर के पास मानासर गांव में बाबा रामदेव के मंदिर के पास लगने वाला यह मेला नागौरी बैलों की खरीद-बिक्री के लिए जाना जाता है। राजस्थान पत्रिका के अनुसार फ़रवरी 2025 के मेले में कुछ ही दिनों में करीब 3.64 करोड़ रुपये के पशु बिक चुके थे, और इनमें से ज़्यादातर राज्य से बाहर के खरीदारों ने लिए।

श्री बलदेव पशु मेला, मेड़ता सिटी

मेड़ता सिटी में चैत्र के शुक्ल पक्ष में लगने वाला यह मेला भी मुख्य रूप से नागौरी बैलों के लिए जाना जाता है। नागौर ज़िले के रामदेव और बलदेव मेले साथ मिलकर नागौरी नस्ल की पहचान बनाते हैं।

श्री वीर तेजाजी पशु मेला, परबतसर

लोक देवता वीर तेजाजी की याद में भाद्रपद में लगने वाला यह मेला राजस्व के हिसाब से राज्य का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। यहां नागौरी बैलों के साथ बीकानेरी ऊंटों की भी खूब खरीद-बिक्री होती है। परबतसर पहले नागौर ज़िले में था, अब डीडवाना-कुचामन ज़िले में है।

श्री मल्लीनाथ पशु मेला, तिलवाड़ा

लूणी नदी के किनारे तिलवाड़ा गांव में लोक देवता मल्लीनाथजी की याद में यह मेला लगता है। ऊंट, घोड़े और बैल यहां के मुख्य पशु हैं, और मेले में लोक कलाकारों के कार्यक्रम भी होते हैं। तिलवाड़ा पहले बाड़मेर ज़िले में था, अब बालोतरा ज़िले में है।

श्री गोमती सागर और चंद्रभागा पशु मेला, झालरापाटन

झालावाड़ का झालरापाटन ऐसा शहर है जहां साल में दो राज्य स्तरीय पशु मेले लगते हैं। गोमती सागर मेला वैशाख में और चंद्रभागा मेला कार्तिक पूर्णिमा के आसपास लगता है। चंद्रभागा नदी के किनारे लगने वाले मेले में मालवी बैल खास होते हैं, और कार्तिक स्नान के कारण यहां श्रद्धालुओं की भी भीड़ रहती है।

पुष्कर पशु मेला, अजमेर

पुष्कर का मेला ऊंटों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। पशुओं की खरीद-बिक्री के साथ यहां पर्यटन विभाग के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर सरोवर में स्नान होता है। इसलिए यह पशु मेला कम और धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव ज़्यादा बन गया है।

श्री गोगामेड़ी पशु मेला, हनुमानगढ़

नोहर तहसील के गोगामेड़ी में लोक देवता गोगाजी के मेले के साथ लगने वाला यह मेला करीब एक महीने चलता है। 2024 में ज़िला प्रशासन ने यहां करीब 40 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया था।

श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला, भरतपुर

भरतपुर में आश्विन के शुक्ल पक्ष में लगने वाले इस मेले में पशुओं की खरीद-बिक्री के साथ प्रदर्शनी भी लगती है। यहां हरियाणवी नस्ल के बैल खास रहते हैं।

श्री शिवरात्रि पशु मेला, करौली

करौली का यह मेला रियासत के ज़माने से लगता आ रहा है। राजस्थान पत्रिका के अनुसार पशुपालन विभाग इसे 1964 से आयोजित कर रहा है, उससे पहले नगरपालिका करती थी। यहां हरियाणवी गोवंश के साथ नागौर, पाली और राजसमंद से ऊंट भी आते हैं।

पशु मेलों का महीने अनुसार कैलेंडर

अगर आप साल भर में कोई पशु मेला देखना चाहते हैं, तो मोटे तौर पर यह क्रम याद रखें (बाकी मेलों के लिए राजस्थान के मेलों का कैलेंडर देखें):

  • अगस्त-सितंबर: तेजाजी (परबतसर), गोगामेड़ी (हनुमानगढ़)
  • सितंबर-अक्टूबर: जसवंत पशु मेला (भरतपुर)
  • अक्टूबर-नवंबर: पुष्कर (अजमेर), चंद्रभागा (झालरापाटन)
  • जनवरी-फ़रवरी: रामदेव पशु मेला (नागौर)
  • फ़रवरी-मार्च: शिवरात्रि पशु मेला (करौली)
  • मार्च-अप्रैल: मल्लीनाथ (तिलवाड़ा), बलदेव (मेड़ता सिटी)
  • मई: गोमती सागर (झालरापाटन)

मेला घूमने का टिप पशुओं की असली रौनक मेले के शुरुआती दिनों में होती है, जब पशु पहुंचते हैं और सौदे होते हैं। आखिरी दिनों में सांस्कृतिक कार्यक्रम ज़्यादा और पशु कम रह जाते हैं। सुबह जल्दी जाएं, धूप चढ़ने से पहले ही ज़्यादातर सौदे हो जाते हैं।

राज्य स्तर के अलावा दूसरे प्रसिद्ध पशु मेले

जैसलमेर के रामदेवरा में भाद्रपद में बाबा रामदेव के मेले के साथ ऊंटों का अच्छा-खासा व्यापार होता है। यह मेला श्रद्धालुओं के लिए ज़्यादा जाना जाता है, पर पशुपालकों के लिए भी अहम है।

2025 से राज्य सरकार ने ज़िला स्तर पर भी पशु मेले शुरू किए हैं। राजस्थान पत्रिका की जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में 11 ज़िले चुने गए: जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, चूरू, बीकानेर, उदयपुर, राजसमंद, पाली, सिरोही, झुंझुनूं और जालोर। इनमें पहला मेला चूरू के ताल छापर में हुआ। इस सूची में नवलगढ़ का बदराणा, सांडेराव का निंबेश्वर महादेव और सायला का कात्यायनी देवी पशु मेला जैसे नाम शामिल हैं।

आज के पशु मेले: घटते पशु, बदलता व्यापार

पशु मेलों की तस्वीर पिछले दस सालों में काफ़ी बदली है। करौली के शिवरात्रि पशु मेले के आंकड़े इसे साफ़ दिखाते हैं। पत्रिका की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार 2016 में वहां 5,126 पशु आए थे, जो 2022 में सिर्फ़ 456 रह गए। 2023 में यह संख्या 539 रही।

पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने इसकी सबसे बड़ी वजह खेती में मशीनों का बढ़ना बताया है। ट्रैक्टर आने के बाद हल चलाने वाले बैलों की ज़रूरत कम हो गई। दूसरी ओर, नागौर जैसे मेलों में राज्य के बाहर के खरीदार बढ़ने से अच्छे नस्ली पशुओं की कीमत अब भी बनी हुई है।

ज़िला स्तर के नए मेले इसी कमी को भरने की कोशिश हैं, ताकि पशुपालक को अपने पशु बेचने के लिए सैकड़ों किलोमीटर न जाना पड़े।

क्या न करें
  • पशुओं के बहुत पास जाकर फ़्लैश से फ़ोटो न लें, बैल और ऊंट भड़क सकते हैं।
  • पशुपालक से पूछे बिना पशु को न छुएं और न खिलाएं।
  • मेले की तारीख सिर्फ़ पिछले साल के हिसाब से तय न करें, तिथि हर साल बदलती है।

परीक्षा के लिए राजस्थान के पशु मेलों से जुड़े तथ्य

  • राजस्थान में 10 राज्य स्तरीय पशु मेले पशुपालन विभाग आयोजित करता है।
  • राजस्व की दृष्टि से सबसे बड़ा पशु मेला: श्री वीर तेजाजी पशु मेला, परबतसर।
  • नागौर ज़िले के मेले (रामदेव, बलदेव) नागौरी बैलों के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • एक ही शहर में दो राज्य स्तरीय पशु मेले: झालरापाटन (गोमती सागर और चंद्रभागा)।
  • चंद्रभागा पशु मेला मालवी नस्ल के लिए जाना जाता है।
  • मल्लीनाथ पशु मेला: तिलवाड़ा (बालोतरा), लूणी नदी के किनारे, चैत्र में।
  • शिवरात्रि पशु मेला करौली में; जसवंत पशु मेला भरतपुर में, दोनों में हरियाणवी नस्ल प्रमुख।
  • गोगामेड़ी पशु मेला हनुमानगढ़ ज़िले की नोहर तहसील में लगता है।

राजस्थान के पशु मेलों से जुड़े सवाल

राजस्थान में कितने राज्य स्तरीय पशु मेले लगते हैं?

राजस्थान में पशुपालन विभाग हर साल 10 राज्य स्तरीय पशु मेले आयोजित करता है। 2025 से ज़िला स्तर के पशु मेले भी शुरू किए गए हैं।

राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला कौन सा है?

राजस्व के हिसाब से परबतसर का वीर तेजाजी पशु मेला सबसे बड़ा माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय पहचान और भीड़ के मामले में पुष्कर मेला सबसे आगे है।

नागौर का पशु मेला कब लगता है?

नागौर के पास मानासर में श्री रामदेव पशु मेला माघ शुक्ल पक्ष में, यानी आम तौर पर जनवरी-फ़रवरी में लगता है।

मल्लीनाथ पशु मेला कहां लगता है?

मल्लीनाथ पशु मेला बालोतरा ज़िले के तिलवाड़ा गांव में लूणी नदी के किनारे चैत्र महीने में लगता है।

चंद्रभागा पशु मेला किस नस्ल के लिए प्रसिद्ध है?

झालरापाटन का चंद्रभागा पशु मेला मालवी नस्ल के बैलों के लिए प्रसिद्ध है। यह कार्तिक पूर्णिमा के आसपास लगता है।

हरियाणवी नस्ल के लिए कौन से पशु मेले प्रसिद्ध हैं?

भरतपुर का जसवंत पशु मेला और करौली का शिवरात्रि पशु मेला हरियाणवी नस्ल के गोवंश के लिए जाने जाते हैं।

झालरापाटन में कौन से पशु मेले लगते हैं?

झालरापाटन में दो राज्य स्तरीय मेले लगते हैं: वैशाख में गोमती सागर पशु मेला और कार्तिक में चंद्रभागा पशु मेला।

राजस्थान के प्रमुख पशु मेले देखने का सबसे आसान रास्ता है कि सर्दियों में एक ट्रिप पुष्कर या चंद्रभागा की और एक फ़रवरी में नागौर की बनाएं। पुष्कर मेला 2026 की पूरी जानकारी पुष्कर मेले वाली पोस्ट में पढ़ें, और लोक देवताओं की कथाएं आगे की पोस्ट में आएंगी।

ये भी पढ़ें

स्रोत: राजस्थान पत्रिका: हर ज़िले में पशु मेले (जून 2025); राजस्थान पत्रिका: करौली शिवरात्रि पशु मेला (फ़रवरी 2024); राजस्थान पत्रिका: रामदेव पशु मेला नागौर (फ़रवरी 2025); राजस्थान पत्रिका: गोगामेड़ी मेला (अगस्त 2024); ICAR: श्री मल्लीनाथ पशु मेला.

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