राजस्थान के मेले ज़्यादातर हिंदू पंचांग की तिथियों पर लगते हैं, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख हर साल खिसकती रहती है। मोटे तौर पर अक्टूबर-नवंबर में दशहरा और पुष्कर, जनवरी-फरवरी में ऊंट उत्सव, नागौर, बेणेश्वर और मरु महोत्सव, मार्च-अप्रैल में खाटू श्याम, गणगौर और कैला देवी, और अगस्त-सितंबर में तीज, गोगाजी, रामदेवरा और तेजाजी के मेले लगते हैं। नीचे अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक का महीने अनुसार पूरा कैलेंडर है।
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अगर आप पुष्कर में ऊंटों की कतारें देखना चाहते हैं, रामदेवरा की पदयात्रा में शामिल होना चाहते हैं या RAS की तैयारी में मेलों की तिथियां याद कर रहे हैं, तो सबसे पहला सवाल यही होता है: कौन सा मेला कब लगता है? इस कैलेंडर में हर मेले की जगह, ज़िला, पंचांग की तिथि और 2026-27 का महीना एक साथ दिया गया है।
एक नज़र में: 2026-27 के सबसे बड़े मेले
| मेला | कब (2026-27) |
|---|---|
| कोटा दशहरा मेला, कोटा | 11 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026, रावण दहन 20 अक्टूबर |
| पुष्कर मेला, अजमेर | 17 से 24 नवंबर 2026 (पशु मेला 10 नवंबर से) |
| कोलायत और चंद्रभागा मेला | कार्तिक पूर्णिमा, 24 नवंबर 2026 |
| ऊंट उत्सव, बीकानेर | जनवरी 2027 |
| बेणेश्वर मेला, डूंगरपुर | माघ पूर्णिमा, 20 फरवरी 2027 |
| मरु महोत्सव, जैसलमेर | माघ पूर्णिमा के आसपास, फरवरी 2027 |
| खाटू श्याम लक्खी मेला, सीकर | फाल्गुन शुक्ल पक्ष, मार्च 2027 |
| गणगौर, जयपुर-उदयपुर | चैत्र शुक्ल तृतीया, 9 अप्रैल 2027 |
| तीज, जयपुर | श्रावण शुक्ल तृतीया, अगस्त 2027 |
| रामदेवरा मेला, जैसलमेर | भाद्रपद शुक्ल 2 से 11, सितंबर 2027 |
राजस्थान के मेलों की तारीख हर साल क्यों बदलती है
राजस्थान के लगभग सभी धार्मिक और लोक मेले विक्रम संवत के महीनों और तिथियों से तय होते हैं, जैसे "भाद्रपद शुक्ल दशमी" या "कार्तिक पूर्णिमा"। चंद्रमा पर आधारित यह कैलेंडर अंग्रेज़ी कैलेंडर से हर साल करीब 11 दिन पीछे रहता है, और हर दो-तीन साल में एक अधिक मास जुड़कर फिर बराबर हो जाता है। इसीलिए पुष्कर मेला कभी अक्टूबर के आखिर में आता है और कभी नवंबर के आखिर में।
दूसरी तरह के मेले पर्यटन विभाग के उत्सव हैं, जैसे बीकानेर का ऊंट उत्सव, जैसलमेर का मरु महोत्सव या जोधपुर का मारवाड़ उत्सव। इनकी तारीख विभाग हर साल घोषित करता है, हालांकि ये भी ज़्यादातर किसी पूर्णिमा के आसपास रखे जाते हैं। अजमेर दरगाह का उर्स इस्लामी हिजरी कैलेंडर के रजब महीने में होता है, इसलिए वह अंग्रेज़ी कैलेंडर में हर साल करीब 11 दिन पहले आ जाता है।
परीक्षा के लिए तिथि याद रखें, क्योंकि सवाल उसी पर आते हैं। यात्रा के लिए उस साल की अंग्रेज़ी तारीख पंचांग या आयोजक से देखें।
अक्टूबर से दिसंबर 2026: दशहरा और कार्तिक के मेले
अक्टूबर: नवरात्र, दशहरा और मारवाड़ उत्सव
- कोटा दशहरा मेला (कोटा): आश्विन महीने में लगने वाला यह मेला करीब चार हफ्ते चलता है। 2026 में 133वां मेला 11 अक्टूबर से 5 नवंबर तक है और रावण दहन 20 अक्टूबर को होगा। इसकी पूरी जानकारी कोटा दशहरा मेले की पोस्ट में है।
- करणी माता मेला (देशनोक, बीकानेर) और जीण माता मेला (रेवासा, सीकर): दोनों मेले साल में दो बार, चैत्र और आश्विन नवरात्र में भरते हैं। 2026 में आश्विन नवरात्र 11 से 19 अक्टूबर तक हैं।
- मारवाड़ उत्सव (जोधपुर): आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) के आसपास होने वाला दो दिन का उत्सव, जिसमें मांड गायकी, घूमर और कालबेलिया नृत्य होते हैं। पहले इसे मांड उत्सव कहा जाता था। पर्यटन मंत्रालय के पोर्टल पर 2026 की तारीख 24-25 अक्टूबर दी गई है (यात्रा से पहले पुष्टि करें)।
नवंबर: पुष्कर, कोलायत और चंद्रभागा
कार्तिक पूर्णिमा राजस्थान में मेलों की सबसे व्यस्त तिथियों में से एक है। इस दिन तीन बड़े मेले एक साथ भरते हैं, और तीनों में पवित्र सरोवर या नदी में स्नान मुख्य रस्म है। 2026 में कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर को है।
- पुष्कर मेला (पुष्कर, अजमेर): कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक धार्मिक मेला और उससे पहले पशु मेला। 2026 में पशु मेला 10 नवंबर से शुरू होगा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं 17 से 24 नवंबर तक हैं, और धार्मिक मेला देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) से कार्तिक पूर्णिमा (24 नवंबर) तक रहेगा। विस्तार से पुष्कर मेले की पोस्ट में पढ़ें।
- कपिल मुनि का मेला (कोलायत, बीकानेर): कार्तिक पूर्णिमा पर कोलायत झील में स्नान के लिए यह मेला भरता है।
- चंद्रभागा मेला (झालरापाटन, झालावाड़): कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रभागा नदी के किनारे लगता है।
दिसंबर: माउंट आबू का शीत उत्सव और उर्स
- शीत उत्सव (माउंट आबू, सिरोही): पर्यटन विभाग का यह उत्सव दिसंबर में होता है।
- ख्वाजा साहब का उर्स (अजमेर): ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर रजब महीने में छह दिन का उर्स होता है, जिसका आखिरी दिन "छठी शरीफ" कहलाता है। 2025 में 814वां उर्स दिसंबर में हुआ था। 2026 की तारीख चांद दिखने पर तय होगी।
जनवरी से मार्च 2027: ऊंट, मरु और बेणेश्वर
जनवरी: बीकानेर ऊंट उत्सव और पतंगबाज़ी
- ऊंट उत्सव (बीकानेर): पर्यटन विभाग का यह उत्सव हर साल जनवरी में होता है।
- मकर संक्रांति पतंग उत्सव (जयपुर): 14 जनवरी के आसपास जयपुर की छतें पतंगों से भर जाती हैं।
फरवरी: नागौर, बेणेश्वर और जैसलमेर का मरु महोत्सव
माघ का महीना पश्चिमी और दक्षिणी राजस्थान के बड़े मेलों का समय है। 2027 में माघ पूर्णिमा 20 फरवरी को है।
- रामदेव पशु मेला (नागौर): माघ शुक्ल पक्ष में लगने वाला पशु मेला। राज्य के सभी बड़े पशु मेलों की सूची राजस्थान के प्रमुख पशु मेले वाली पोस्ट में है।
- बेणेश्वर मेला (डूंगरपुर): माघ शुक्ल एकादशी से माघ पूर्णिमा तक सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर भरता है। इसे "आदिवासियों का कुंभ" और "वागड़ प्रयाग" कहा जाता है। यहां बेणेश्वर महादेव का शिव मंदिर है, और संत मावजी से जुड़ा विष्णु मंदिर भी।
- मरु महोत्सव (जैसलमेर): माघ पूर्णिमा के आसपास होने वाला उत्सव, जिसका समापन सम के रेतीले धोरों पर होता है। 2027 की तारीख पर्यटन विभाग घोषित करेगा।
मार्च: खाटू श्याम, होली और शीतला माता
- खाटू श्याम लक्खी मेला (खाटू, सीकर): फाल्गुन शुक्ल पक्ष में, मुख्य दिन एकादशी। मेले, दर्शन और रास्तों की पूरी जानकारी खाटू श्याम मंदिर की पोस्ट में है।
- ब्रज होली (भरतपुर): फाल्गुन पूर्णिमा से पहले भरतपुर में ब्रज की होली के रंग दिखते हैं। 2027 में होली मार्च में है।
- शीतला माता का मेला (शील की डूंगरी, चाकसू, जयपुर): चैत्र कृष्ण अष्टमी को, यानी होली के करीब आठ दिन बाद। इस दिन घरों में ठंडा (बासी) खाना खाने की परंपरा है, जिसे बास्योड़ा कहते हैं।
अप्रैल से जून 2027: चैत्र और वैशाख के मेले
अप्रैल: गणगौर, कैला देवी और महावीरजी
चैत्र शुक्ल पक्ष राजस्थान में मेलों से भरा रहता है। 2027 में चैत्र नवरात्र अप्रैल के पहले हफ्ते से शुरू होंगे।
- गणगौर (जयपुर, उदयपुर और पूरे राजस्थान में): होली के अगले दिन से चैत्र शुक्ल तृतीया तक महिलाएं गणगौर पूजती हैं। तृतीया को जयपुर में गणगौर की शाही सवारी निकलती है। 2027 में गणगौर 9 अप्रैल को है। उदयपुर का मेवाड़ उत्सव भी गणगौर के साथ ही मनाया जाता है।
- कैला देवी का लक्खी मेला (करौली): चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से दशमी तक, अष्टमी को सबसे ज़्यादा भीड़। "लक्खी" यानी जिसमें लाखों लोग आएं।
- करणी माता और जीण माता के मेले: चैत्र नवरात्र में दूसरी बार।
- श्री महावीरजी मेला (करौली): चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (महावीर जयंती) से वैशाख कृष्ण द्वितीया तक।
- सालासर बालाजी का मेला (सुजानगढ़, चूरू): चैत्र पूर्णिमा, यानी हनुमान जयंती पर।
- धींगा गवर (जोधपुर): वैशाख कृष्ण तृतीया को होने वाला गवर पूजा का मेला, जिसे "बेंतमार मेला" भी कहते हैं।
मई-जून: माउंट आबू और सीताबाड़ी
- ग्रीष्म उत्सव (माउंट आबू): मई में, बुद्ध पूर्णिमा के आसपास।
- सीताबाड़ी का मेला (केलवाड़ा, बारां): ज्येष्ठ अमावस्या को।
जुलाई से सितंबर 2027: तीज और लोक देवताओं के मेले
बारिश का मौसम राजस्थान में लोक देवताओं के मेलों का मौसम है। इन दिनों सड़कों पर ध्वजा लिए पैदल यात्रियों के जत्थे दिखना आम बात है।
अगस्त: तीज, कजली तीज और गोगाजी
- तीज (जयपुर): श्रावण शुक्ल तृतीया को, जिसे हरियाली तीज भी कहते हैं। जयपुर में तीज माता की सवारी निकलती है।
- कजली तीज (बूंदी): भाद्रपद कृष्ण तृतीया को, जब बूंदी में कजली तीज की सवारी और मेला होता है।
- गोगाजी का मेला (गोगामेड़ी, हनुमानगढ़): भाद्रपद कृष्ण नवमी यानी गोगा नवमी को।
सितंबर: रामदेवरा, तेजाजी और भर्तृहरि
- रामदेवरा मेला (रामदेवरा/रुणेचा, जैसलमेर): भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक बाबा रामदेव की समाधि पर। दूर-दूर से श्रद्धालु पैदल यात्रा करके यहां पहुंचते हैं। बाबा रामदेव की कथा लोक देवताओं वाली पोस्ट में पढ़ें।
- तेजाजी का मेला (परबतसर, नागौर): भाद्रपद शुक्ल दशमी यानी तेजा दशमी को।
- भर्तृहरि का मेला (अलवर): भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को, राजा भर्तृहरि की तपोभूमि पर।
राजस्थान के मेले: हिंदू महीने अनुसार पूरा कैलेंडर
अगर आपको तिथि के हिसाब से याद रखना है, तो यह टेबल सबसे काम की है। अंग्रेज़ी महीना मोटा अनुमान है, जो हर साल थोड़ा आगे-पीछे होता है।
| हिंदू महीना (लगभग अंग्रेज़ी महीना) | प्रमुख मेले और तिथि |
|---|---|
| चैत्र (मार्च-अप्रैल) | शीतला माता, चाकसू (कृष्ण 8) · गणगौर (शुक्ल 3) · कैला देवी, करौली (शुक्ल 1-10) · महावीरजी, करौली (शुक्ल 13 से) · सालासर (पूर्णिमा) · करणी माता और जीण माता (नवरात्र) |
| वैशाख (अप्रैल-मई) | धींगा गवर, जोधपुर (कृष्ण 3) · माउंट आबू ग्रीष्म उत्सव (बुद्ध पूर्णिमा के आसपास) |
| ज्येष्ठ (मई-जून) | सीताबाड़ी, बारां (अमावस्या) |
| श्रावण (जुलाई-अगस्त) | तीज, जयपुर (शुक्ल 3) |
| भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) | कजली तीज, बूंदी (कृष्ण 3) · गोगामेड़ी (कृष्ण 9) · भर्तृहरि, अलवर (शुक्ल 8) · तेजाजी, परबतसर (शुक्ल 10) · रामदेवरा (शुक्ल 2-11) |
| आश्विन (सितंबर-अक्टूबर) | कोटा दशहरा · करणी माता और जीण माता (नवरात्र) · मारवाड़ उत्सव (पूर्णिमा के आसपास) |
| कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) | पुष्कर (शुक्ल 11 से पूर्णिमा) · कोलायत (पूर्णिमा) · चंद्रभागा, झालरापाटन (पूर्णिमा) |
| पौष (दिसंबर-जनवरी) | माउंट आबू शीत उत्सव (दिसंबर) · बीकानेर ऊंट उत्सव (जनवरी) |
| माघ (जनवरी-फरवरी) | नागौर पशु मेला (शुक्ल पक्ष) · बेणेश्वर, डूंगरपुर (शुक्ल 11 से पूर्णिमा) · मरु महोत्सव, जैसलमेर (पूर्णिमा के आसपास) |
| फाल्गुन (फरवरी-मार्च) | खाटू श्याम लक्खी मेला (शुक्ल पक्ष, मुख्य दिन एकादशी) · ब्रज होली, भरतपुर (पूर्णिमा से पहले) |
मेला-यात्रा प्लान करने का टिप किसी एक तिथि पर कई मेले हों तो एक ही ट्रिप में जोड़ लें। जैसे कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर के बाद अगले दिन कोलायत, या माघ पूर्णिमा के आसपास जैसलमेर का मरु महोत्सव और रास्ते में नागौर का पशु मेला। बड़े मेलों (पुष्कर, खाटू, रामदेवरा) में होटल और ट्रेन टिकट एक-दो महीने पहले बुक करें।
- पिछले साल की अंग्रेज़ी तारीख देखकर टिकट बुक न करें; तिथि वही रहती है, तारीख बदल जाती है।
- पर्यटन उत्सवों की तारीख सिर्फ अंदाज़े पर तय न करें, उस साल की घोषणा का इंतज़ार करें।
- लक्खी मेलों में भीड़ के समय बच्चों और बुज़ुर्गों को अकेला न छोड़ें; दर्शन की लाइन में कीमती सामान कम से कम रखें।
परीक्षा के लिए राजस्थान के मेलों से जुड़े तथ्य
- "आदिवासियों का कुंभ": बेणेश्वर मेला, डूंगरपुर (माघ पूर्णिमा, सोम-माही-जाखम संगम)।
- कार्तिक पूर्णिमा पर तीन बड़े मेले: पुष्कर (अजमेर), कोलायत (बीकानेर), चंद्रभागा (झालरापाटन, झालावाड़)।
- भाद्रपद शुक्ल 2 से 11: रामदेवरा मेला; भाद्रपद शुक्ल 10: तेजा दशमी, परबतसर।
- भाद्रपद कृष्ण 9: गोगा नवमी, गोगामेड़ी (हनुमानगढ़)।
- भाद्रपद कृष्ण 3: कजली तीज, बूंदी; श्रावण शुक्ल 3: तीज, जयपुर।
- चैत्र कृष्ण 8: शीतला माता मेला, शील की डूंगरी (चाकसू); चैत्र शुक्ल 3: गणगौर।
- वैशाख कृष्ण 3: धींगा गवर (बेंतमार मेला), जोधपुर।
- ज्येष्ठ अमावस्या: सीताबाड़ी मेला, केलवाड़ा (बारां)।
- करणी माता (देशनोक) और जीण माता (रेवासा) के मेले साल में दो बार, दोनों नवरात्र में।
- मारवाड़ उत्सव (जोधपुर) का पुराना नाम मांड उत्सव।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजस्थान के मेले कब लगते हैं?
साल भर, लेकिन सबसे ज़्यादा मेले चैत्र (मार्च-अप्रैल), भाद्रपद (अगस्त-सितंबर), कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) और माघ (जनवरी-फरवरी) में लगते हैं। ज़्यादातर मेले हिंदू पंचांग की तिथि से तय होते हैं।
पुष्कर मेला 2026 कब है?
पुष्कर मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम 17 से 24 नवंबर 2026 तक हैं। पशु मेला 10 नवंबर से शुरू होगा और कार्तिक पूर्णिमा स्नान 24 नवंबर को है।
कार्तिक पूर्णिमा पर राजस्थान में कौन से मेले लगते हैं?
पुष्कर (अजमेर), कोलायत (बीकानेर) और चंद्रभागा (झालरापाटन, झालावाड़) के मेले। 2026 में कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर को है।
आदिवासियों का कुंभ किस मेले को कहते हैं?
डूंगरपुर के बेणेश्वर मेले को। यह माघ पूर्णिमा पर सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर भरता है।
रामदेवरा मेला कब लगता है?
भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक, जो अंग्रेज़ी कैलेंडर में आम तौर पर अगस्त-सितंबर में पड़ता है।
तेजाजी का मेला कब और कहां लगता है?
भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) को नागौर ज़िले के परबतसर में।
बीकानेर ऊंट उत्सव और जैसलमेर मरु महोत्सव कब होते हैं?
ऊंट उत्सव जनवरी में और मरु महोत्सव माघ पूर्णिमा के आसपास (फरवरी) होता है। दोनों की तारीख पर्यटन विभाग हर साल घोषित करता है।
राजस्थान के मेलों की तारीख हर साल क्यों बदलती है?
क्योंकि वे चंद्रमा पर आधारित हिंदू पंचांग की तिथियों से लगते हैं, जो अंग्रेज़ी कैलेंडर से हर साल करीब 11 दिन खिसकती हैं।
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राजस्थान के मेले देखने का सबसे अच्छा तरीका है तिथि पकड़कर चलना: कैलेंडर में अपनी पसंद का मेला चुनें, उस साल की तारीख पंचांग या आयोजक से मिलाएं और फिर यात्रा तय करें। आगे इस कैलेंडर के हर बड़े मेले की अलग पोस्ट यहीं जुड़ती जाएगी।
स्रोत: ETV Bharat (पुष्कर मेला 2026); Times Now हिंदी; ETV Bharat (कोटा दशहरा 2026); Incredible India, पर्यटन मंत्रालय; दृष्टि IAS (बेणेश्वर मेला); RajRAS; RajRAS (RAS Mains); Chronicle India; VedPanchang; Drik Panchang





